दैनिक भास्कर समाचार पत्र ने अच्छी पहल की है। भारत के लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि आम जनता इस बात को समझे कि पार्लियामेंट्री सिस्टम के पक्ष में अम्बेडकर, पटेल और गाँधी जैसे विचारक नहीं थे, और यह कि प्रेसिडेंशियल सिस्टम देश के लोकतंत्र के लिए एक अच्छा विकल्प है।  

अम्बेडकर ने संविधान सभा को अमरीका के मॉडल पर आधारित “यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ इंडिया” का सुझाव दिया था, परन्तु इस पर सभा में विचार भी नहीं हुआ। पटेल और संविधान सभा के अन्य दिग्गज भी चाहते थे कि राष्ट्रपति और राज्यों के गवर्नरों का चुनाव अमरीका की तरह जनता प्रत्यक्ष रूप से करे, किंतु इस पर नेहरू राजी नहीं हुए। गाँधी जी का सुझाव अमरीका की तर्ज पर नहीं अपितु पंचायतों पर आधारित एक व्यवस्था बनाने का था, परन्तु यह मॉडल संविधान सभा में पेश भी नहीं किया गया।  

इंदिरा गाँधी का इमरजेंसी काल में प्रेसिडेंशियल सिस्टम का सुझाव अमरीका के मॉडल पर नहीं परन्तु  इसकी आड़ में एक ऐसा सिस्टम बनाने का था जिसमे एकल व्यक्ति राज कर सके।  भारत के लिए अच्छा हुआ यह लागू नहीं हुआ । वाजपेयी चाहते थे कि अमरीका के सिस्टम को अपनाने पर भारत में विचार हो, परन्तु कांग्रेस ने बहुत विरोध किया और संविधान पर गढ़ित वेंकटाचलीया समिति को केवल पार्लियामेंट्री सिस्टम के दायरे में ही अपने सुझाव रखने पड़े।

पार्लियामेंट्री सिस्टम प्रधानमंत्री को सर्वेसर्वा बनाता है और यह किसी भी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। भारत को प्रेसिडेंशियल सिस्टम अपनाने पर विचार करना चाहिए क्योंकि इसमें कोई भी अधिकारी सर्वशक्तिमान नहीं बन सकता, प्रेजिडेंट भी नहीं।

-भानु धमीजा

[दैनिक भास्कर वेबसाइट पर 25 जुलाई 2022 को प्रकाशित लेख के कुछ अंश]

अंबेडकर, इंदिरा या अटल की चली होती तो भारत में अमेरिका जैसा राष्ट्रपति सिस्टम होता, जानिए क्यों चुना पार्लियामेंट्री सिस्टम

लेखक: अनुराग आनंद

द्रौपदी मुर्मू ने आज देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले ली। भारत में राष्ट्रपति राज्य के प्रधान होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी के बाद 1970 में इंदिरा गांधी और 1990 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी की चली होती तो भारत के राष्ट्रपति के पास भी अमेरिकी राष्ट्रपति की तरह शक्तियां होतीं।

आज मंडे मेगा स्टोरी में जानते हैं कि जब अंबेडकर से लेकर गांधी तक देश में US की तरह राष्ट्रपति सिस्टम रखना चाहते थे, तो फिर हमने पार्लियामेंट्री सिस्टम क्यों अपनाया।

सबसे पहले बात संसदीय और राष्ट्रपति प्रणाली पर होने वाले डिबेट की..

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